Thursday, April 12, 2012

पहले ऑफिस की पहली पीड़ा





बड़े बड़े सपने तो सब देख ही लेते हैं, खुशनसीब होते हैं वो जो उन्‍हें पा लेते हैं मैंने भी एक सपना देखा है एक बहुत बड़ा पत्रकार बनने का और उसके लिए पहली साढ़ी पर कदम भी रख चुकी हूं. आज से तीन महीने पहले दैनिक जागरण में मेरा चयन हुआ था, पूरे भारत में आयोजित हुई एक परीक्षा को पास कर के मैंने दैनिक जागरण लखनउ में जीवन की पहली पारी खेलने आई थी. बहुत खुशी और बहुत ही जोश के साथ तीन महीने निकाल दिए, कोई फिक्र नहीं थीआशुतोष सर, आलोक सर, आफरोज सर, जितेंद्र सर, क्रांति सर जैसे दिग्‍गजों का हाथ सर पर था. हर दिन खुशी का बीत रहा था. समझ में नहीं आ रहा था कि लोग नौकरी में इतना तनाव क्‍यों ले‍ते हैं कि तभी अचानक आज कुछ हुआ मेरे साथ और मन मस्तिष्‍क तनाव से भर गया.
रोली मैम मेरी बड़ी बहन जैसी हैं और उनकी हर बात को माना है मैं ने, पर आज एक गलती या यूं कह लूं कि लापरवाही से उनका पारदर्शी दिल जैसे तोड़ दिया मैंने. उनका काम सही समय पर ना कर के मैंने ना केवल अपनी लापरवाही दिखा दी बल्कि यह भी समझ आ गया कि आख्रिर क्‍यों लोग इतना तनाव लेते हैं. आलोक सर ने जब हंसते हुए कहा कि रिर्पोंटिग के लक्षण नहीं हैं तुम्‍हारे, तो मेरा दिल जैसे धक से रह गयामजाक में ही सही पर बहुत बड़ी बात थी मेरे लिए
आज पूरे दिन मैंने यही सोचा कि कैसे रोली मैम से अपनी गलती की माफी मांगू? वह मुझे माफ करेंगी या नहीं? कहीं उन्‍होंने मुझे माफ नहीं किया तो? अगर डांट के वापसे भेज दिया तो?.. बहुत सोचा.. इतना सोचा कि कब 9 बज गया ध्‍यान ही नहीं दिया। इधर 9 बज चुके थे आलोक सर प्रादेशिक देश विदेश (जो कि मेरे जिम्‍मे था) का इंतजार कर रहे थे. और उधर रोली मैम की नाराजगी से मुझसे पानी भी नहीं पिया जा रहा था। थोड़ी देर के लिए वहां से ध्‍यान हटा के मैंने पेज बनाया और छोड़ा। उसके बाद सारे ख्‍याल दिमाग से निकाल कर मैं गई मैम के पास उनसे मिलने और अपनी गलती की माफी मांगने, पर व्‍यस्‍तता के कारण उनका मुझपर ध्‍यान नहीं गया। घर होता तो शायद रो देती पर एक मजबूत और हिम्‍मती पत्रकार बनने का सपना मेरे दिल में आ कर मुझे ताकत देता रहा और मैं यह सोच के वहां से आ गई कि कल फिर वापस आ कर उनसे माफी मांगूगी।
गलती तो मुझसे हुई है, पर सबसे बड़ी बात की मुझे खुशी है कि मैंने अपनी गलती मान के झुकना सीख‍ लिया है और गलती दोबारा ना हो इसकी भी एक सीख मिल गई है

2 comments:

  1. NICE SASHA..तुमने अच्छा लिखा भी है.. अच्छी सोच भी...ऑफिस में कई ऐसे पल पाएंगे जो तुम्हें एक सीख देंगे... सिर्फ गलती मान लेने से ही कुछ नहीं होता.. उन्हें दोबारा नहीं दोहराने पर ही शिखर तक पहुंचा जा सकता है.. ऐसा हमारे बड़े कहते हैं...सो ENJOY OFFICE LIFE..NICE HEART

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  2. अपनी गलती मान के झुकना सीख‍ लिया है और गलती दोबारा ना हो इसकी भी एक सीख मिल गई है…gud

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